अम्बेडकर नगर। अकबरपुर तहसील के मोहिद्दीनपुर भीखपुर गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे हैं। आज सुबह एक मारपीट की घटना के बाद पीड़ित पक्ष को ही कोतवाली में लॉकअप में बंद कर दिया गया, जबकि विपक्षियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, पीड़ित ने पुलिस पर घूसखोरी और जमीन कब्जा करवाने का आरोप लगाया है, जिसने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। पीड़ित के परिवार के सदस्यों को अभी तक थाने में बैठाया गया है।



क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, मोहिद्दीनपुर भीखपुर गांव में जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। आज सुबह इस विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जब दोनों पक्षों में मारपीट हुई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनके साथ मारपीट की गई, लेकिन जब वे अकबरपुर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, तो पुलिस ने उल्टा उन्हें ही लॉकअप में बंद कर दिया। पीड़िता ने बताया, "हमें थाने में ले जाकर बंद कर दिया गया, और दूसरी तरफ विपक्षियों को खुली छूट दी गई। उनकी मौजूदगी में हमारी जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया।"

पीड़ित ने आरोप लगाया कि पुलिस ने न तो उनकी शिकायत सुनी और न ही उन्हें मेडिकल जांच के लिए भेजा। इसके विपरीत,  फिर भी पुलिस ने पीड़ित को ही हिरासत में ले लिया।


पीड़ित के आरोप: घूसखोरी और पक्षपात


पीड़ित ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर इल्जाम लगाते हुए कहा, "पुलिस विपक्षियों से घूस लेकर हमारी जमीन कब्जा करवा रही है। हमारी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हो रही, उल्टा हमें ही परेशान किया जा रहा है।" पीड़िता ने आगे बताया कि पुलिस की शह पर विपक्षी बेखौफ होकर निर्माण कार्य कर रहे हैं, जबकि उनका परिवार डर और दबाव में जी रहा है। सूत्रों का दावा है कि इस मामले में पुलिस और विपक्षियों के बीच सांठगांठ हो सकती है, जिसके चलते पीड़ित पक्ष को दबाने की कोशिश की जा रही है।


नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।


यह मामला अब नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर चर्चा में है। BNS, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुई, पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ले चुकी है। इसके तहत जमीन विवाद, मारपीट, और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सख्त प्रावधान किए गए हैं। इस मामले में निम्नलिखित धाराएं संभावित रूप से लागू हो सकती हैं:


धारा 115 (BNS) - स्वेच्छा से चोट पहुंचाना: मारपीट की घटना के लिए विपक्षियों पर यह धारा लगाई जा सकती है।


धारा 319 (BNS) - भ्रष्टाचार और कर्तव्य में लापरवाही: पुलिस पर घूसखोरी और पक्षपात के आरोपों की जांच इस धारा के तहत हो सकती है।


धारा 351(2) (BNS) - आपराधिक धमकी: यदि पीड़ित को डराया-धमकाया गया, तो यह धारा लागू हो सकती है।


धारा 324 (BNS) - अवैध हिरासत: पीड़ित को बिना उचित कारण लॉकअप में रखने के लिए पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा सकती है।


पीड़ित ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो उनकी जमीन पर पूरी तरह कब्जा हो जाएगा।


पुलिस की चुप्पी, जनता में आक्रोश


अकबरपुर कोतवाली की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वायरल वीडियो के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस के रवैये को लेकर गुस्सा बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं और इसे पुलिसिया दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा, "अगर पीड़ित को ही सजा दी जाएगी, तो आम आदमी न्याय के लिए कहां जाए?"



आगे क्या?


यह मामला अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। नए भारतीय न्याय संहिता के तहत इसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। अगर पीड़ित के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा धब्बा होगा। फिलहाल, जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और जांच की उम्मीद की जा रही है, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और दोषियों को सजा।


अम्बेडकर नगर की यह घटना एक बार फिर पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में सच सामने आएगा या यह भी अनगिनत अनसुलझे विवादों में से एक बनकर रह जाएगा। हालांकि हिंदी संवाद न्यूज़ गाली गलौज की पुष्टि नहीं करता है। कौन किसे दे रहा है?

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